परमवीर चक्र और अशोक चक्र की असली कहानियाँ – किस युद्ध या घटना में मिला अवॉर्ड?

परमवीर चक्र और अशोक चक्र – भारत सदियों से अपने वीर सपूतों और उनकी अदम्य बहादुरी के लिए जाना जाता है। जब भी देश पर कोई संकट आया है, हमारे सैनिकों ने अपनी जान की परवाह किए बिना दुश्मन के सामने सीना तानकर खड़े होकर भारत की रक्षा की है। इन्हीं वीरता और बलिदान को सम्मानित करने के लिए भारत सरकार ने दो सर्वोच्च वीरता पुरस्कार स्थापित किए – परमवीर चक्र और अशोक चक्र। परमवीर चक्र युद्धकाल में असाधारण साहस और पराक्रम दिखाने वाले सैनिकों को दिया जाता है, जबकि अशोक चक्र शांतिकाल में आतंकवाद विरोधी अभियानों, आंतरिक सुरक्षा या अन्य संकटपूर्ण परिस्थितियों में अप्रतिम वीरता दिखाने वाले सैनिकों और सुरक्षाबलों को प्रदान किया जाता है। ये दोनों पुरस्कार केवल पदक नहीं हैं, बल्कि राष्ट्र की ओर से उन अमर शूरवीरों के प्रति आभार और श्रद्धांजलि हैं जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति तक दे दी।

आइए अब जानते हैं ऐसे ही 8 महान शूरवीरों की प्रेरणादायक कहानियाँ, जिनकी वीरता, साहस और बलिदान की गाथाएँ भारतीय इतिहास में हमेशा सुनहरे अक्षरों में लिखी रहेंगी और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेंगी


🏅 परमवीर चक्र की प्रसिद्ध कहानियाँ

1. मेजर सोमनाथ शर्मा (1947 – पहला परमवीर चक्र विजेता)

  • युद्ध/घटना: 1947-48 का पहला भारत-पाक युद्ध (कश्मीर युद्ध)
  • कहानी: घायल होने और एक हाथ में प्लास्टर चढ़ा होने के बावजूद श्रीनगर एयरपोर्ट की रक्षा करते रहे। 3 नवंबर 1947 को वीरगति को प्राप्त हुए।
    👉 भारत का पहला परमवीर चक्र (मरणोपरांत)

2. सुबेदार मेजर अब्दुल हमीद (1965)

  • युद्ध/घटना: भारत-पाक युद्ध 1965, कश्मीर/खेमकरण सेक्टर
  • कहानी: अपनी जीप-माउंटेड रेकोइललेस गन से पाकिस्तानी पैटन टैंकों को तबाह किया। उन्होंने अकेले 7 टैंक नष्ट किए, लेकिन अंत में शहीद हो गए।
    👉 उनकी बहादुरी ने भारत को निर्णायक बढ़त दिलाई।

3. कैप्टन विक्रम बत्रा (कारगिल युद्ध 1999)

  • युद्ध/घटना: कारगिल युद्ध, प्वाइंट 5140 और 4875 पर कब्जा
  • कहानी: दुश्मनों से आमने-सामने की लड़ाई में निडर होकर लड़े। उनका नारा था – “ये दिल मांगे मोर”। प्वाइंट 4875 पर लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए।
    👉 उनकी बहादुरी ने कारगिल युद्ध में भारत की जीत सुनिश्चित की।

4. ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव (कारगिल युद्ध 1999)

  • युद्ध/घटना: टाइगर हिल पर कब्जा
  • कहानी: बुरी तरह घायल होने के बावजूद लगातार ग्रेनेड फेंककर दुश्मन के बंकर नष्ट किए। उनकी जांबाज़ी से टाइगर हिल भारतीय सेना के कब्जे में आया।
    👉 आज भी ज़िंदा हैं और भारत के सबसे युवा जीवित परमवीर चक्र विजेता हैं।

🏅 अशोक चक्र की प्रसिद्ध कहानियाँ

5. कैप्टन मनोज कुमार पांडे (कारगिल युद्ध 1999)

  • युद्ध/घटना: कारगिल युद्ध – खालूबार प्वाइंट
  • कहानी: दुश्मन की गोलीबारी का सामना करते हुए बंकर-दर-बंकर कब्जा किया। कई गोलियां लगने के बाद भी अपनी टुकड़ी का नेतृत्व किया।
    👉 मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित।

6. कर्नल नीरेन चक्रवर्ती (1983)

  • घटना: पंजाब में आतंकवाद विरोधी अभियान
  • कहानी: खालिस्तानी आतंकियों से आमना-सामना करते हुए अपने सैनिकों की जान बचाई और वीरता से दुश्मनों को मार गिराया।
    👉 अशोक चक्र सम्मानित।

7. कैप्टन अशोक कुमार (2005)

  • घटना: कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियान
  • कहानी: एक ऑपरेशन में आतंकियों को पकड़ने के दौरान अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
    👉 मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित।

8. हवलदार हंगपन दादा (2016)

  • घटना: जम्मू-कश्मीर, कुपवाड़ा में आतंकवादियों से मुठभेड़
  • कहानी: 72 घंटे तक लगातार दुश्मनों से लड़े, अकेले 3 आतंकियों को मार गिराया। गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी अंतिम सांस तक लड़ते रहे।
    👉 उनकी वीरता को देखते हुए मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित।

✨ निष्कर्ष

  • परमवीर चक्र: युद्धकाल में असाधारण बहादुरी और बलिदान (जैसे मेजर सोमनाथ शर्मा, कैप्टन विक्रम बत्रा)।
  • अशोक चक्र: शांतिकाल या आतंकवाद विरोधी अभियानों में असाधारण साहस (जैसे हवलदार हंगपन दादा)।

इन वीर गाथाओं से हमें यह सिखने को मिलता है कि भारतीय सैनिक हर परिस्थिति में मातृभूमि की रक्षा के लिए तत्पर रहते हैं। वे अपने कर्तव्य को सर्वोपरि मानकर, देश की सुरक्षा हेतु प्राणों की आहुति देने से भी कभी पीछे नहीं हटते।


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