भारत ने आज़ादी के बाद से तेज़ी से विकास किया है, लेकिन इसी के साथ देश ने ऐसे कई घोटाले भी देखे हैं, जिन्होंने अर्थव्यवस्था, राजनीति और जनता के विश्वास को गहरा झटका दिया। हर दशक में ऐसे स्कैम सामने आए, जिनकी रकम करोड़ों से लेकर लाखों करोड़ तक पहुंच गई।
इस पोस्ट में हम भारत के इतिहास के सबसे बड़े घोटालों (India’s Biggest Scams) की पूरी जानकारी आसान शब्दों में देंगे—
✔ घोटाला क्या था
✔ कितनी राशि शामिल थी
✔ कैसे हुआ
✔ देश पर इसका क्या असर पड़ा
⭐ 1. कोयला घोटाला (Coal Scam) – ₹1,86,000 करोड़
भारत का सबसे बड़ा घोटाला
2004 से 2009 के बीच कई निजी कंपनियों को कोयला ब्लॉक बेहद कम कीमत पर और बिना पारदर्शी नीलामी के आवंटित कर दिए गए।
सरकारी अनुमान के अनुसार इससे देश को लगभग 1.86 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
क्यों बड़ा घोटाला माना गया?
- राष्ट्रीय संसाधनों की गलत बंटवारा
- सरकार की पारदर्शिता पर सवाल
- राजनीतिक विवादों का सबसे बड़ा कारण
⭐ 2. 2G स्पेक्ट्रम घोटाला – ₹1,76,000 करोड़
भारत के इतिहास का सबसे चर्चित घोटाला
2008 में telecom spectrum लाइसेंस पहले-आए-पहले-पाए (First Come First Serve) नियम के तहत बेहद कम कीमत पर बांटे गए।
मुख्य मुद्दे:
- लाइसेंस मार्केट रेट से कई गुना सस्ते
- कंपनियों को अनुचित फायदा
- देश को भारी आर्थिक नुकसान
यह घोटाला कई सालों तक हर खबर की हेडलाइन बना रहा।
⭐ 3. कॉमनवेल्थ गेम्स (CWG) घोटाला – ₹70,000 करोड़
2010 में दिल्ली में आयोजित CWG Games में स्टेडियम निर्माण, खरीददारी, उपकरण, मशीनों और सेवाओं पर फर्जी खर्च दिखाया गया।
क्या हुआ था?
- 1,000 रुपए की चीज़ 10,000 में खरीदी गई
- खराब क्वालिटी उपकरण
- सौदों में भारी कमीशन
इस घोटाले ने भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुँचाया।
⭐ 4. सरदार सरोवर बांध घोटाला – ₹70,000 करोड़ (अनुमानित)
नर्मदा नदी पर बने इस मेगा प्रोजेक्ट में विस्थापितों के पुनर्वास, जमीन आवंटन और निर्माण खर्च में भारी गड़बड़ियों के आरोप लगे।
असर:
- हजारों परिवार प्रभावित
- फर्जी बिल, गलत कॉन्ट्रैक्ट
- कार्य में वर्षों की देरी
⭐ 5. नीरव मोदी – PNB बैंक फ्रॉड – ₹13,500 करोड़
भारत का सबसे बड़ा बैंकिंग फ्रॉड
हीरा व्यापारी नीरव मोदी और मेहुल चोकसी ने PNB बैंक से फर्जी LoU (Letter of Undertaking) निकालकर हजारों करोड़ का कर्ज लिया और वापस नहीं किया।
कैसे हुआ?
- बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत
- SWIFT सिस्टम का गलत उपयोग
- फर्जी गारंटी बनाकर लोन उठाया
⭐ 6. विजय माल्या बैंक लोन डिफॉल्ट – ₹9,000 करोड़
किंगफिशर एयरलाइंस घाटे में जाने के बाद विजय माल्या ने कई बैंकों से लोन लिया और चुका नहीं पाया।
इसके बाद वह देश छोड़कर विदेश भाग गया।
इसके बाद क्या हुआ?
- सरकार ने संपत्तियाँ जब्त कीं
- कई केस कोर्ट में चल रहे हैं
⭐ 7. चारा घोटाला – ₹950 करोड़
(बिहार का सबसे बड़ा राजनीतिक घोटाला)
इसमें सरकारी खजाने से पशु चारे और दवाइयों के नाम पर फर्जी बिल बनाकर करोड़ों रुपये निकाले गए।
मुख्य बिंदु:
- 1990–1996 के बीच चल रहा था
- कई अफसर और नेता शामिल
- अदालत द्वारा सजा भी हुई
⭐ 8. हर्षद मेहता स्टॉक मार्केट स्कैम – ₹4,000 करोड़ (1992)
भारत का सबसे प्रसिद्ध स्टॉक मार्केट स्कैम
बैंकों से फर्जी बैंक रिसीट (BR) उपयोग करके शेयर बाजार में एक कृत्रिम बूम (Artificial Bull Run) बनाया गया।
असर:
- शेयर बाजार में भारी गिरावट
- लाखों निवेशक प्रभावित
- भारतीय वित्तीय सिस्टम में बड़े सुधार हुए
⭐ 9. सत्यम कंप्यूटर घोटाला – ₹7,000 करोड़
सत्यम कंपनी के चेयरमैन रामलिंगा राजू ने कंपनी के अकाउंट्स में मुनाफे और बैलेंस शीट फर्जी बढ़ाकर दिखाए थे।
भारत का सबसे बड़ा कॉर्पोरेट फ्रॉड
- कंपनी की वैल्यू झूठी बनाई गई
- निवेशकों को भारी नुकसान
⭐ 10. व्यापम घोटाला – हज़ारों करोड़ + फर्जी भर्ती
(मध्यप्रदेश का बड़े पैमाने पर एग्जाम और भर्ती स्कैम)
इसमें मेडिकल, पुलिस, शिक्षक सहित सैकड़ों परीक्षाओं में फर्जी अभ्यर्थी और भ्रष्टाचार सामने आए।
🧭 इन घोटालों का भारत पर असर
✔ जनता का भरोसा कमजोर हुआ
✔ सरकारों की विश्वसनीयता पर सवाल
✔ आर्थिक और राजनीतिक अस्थिरता
✔ सिस्टम में सुधार की जरूरत महसूस हुई
✔ पारदर्शिता के लिए नए कानून बने
📌 निष्कर्ष
भारत के इन बड़े घोटालों ने यह साफ दिखाया कि जब सिस्टम पारदर्शी नहीं होता, तब राष्ट्र को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। लेकिन इन मामलों के सामने आने के बाद—
- CAG की भूमिका बढ़ी
- बैंकिंग और फाइनेंस सिस्टम में सुधार हुए
- कई नए कानून लागू हुए




